Wear Gold Jewelry: आभूषण न केवल महिलाओं के श्रृंगार का एक अहम हिस्सा होते हैं बल्कि उनके धारण करने के विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी होते हैं. सोने और चांदी के आभूषणों को विभिन्न शारीरिक स्थानों पर पहनने की प्रथा न केवल सुंदरता संबंधी है बल्कि यह विभिन्न धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है.
क्यों बैन है कमर के नीचे सोना पहनना?
ज्योतिष शास्त्र (Astrological Science) के अनुसार सोना धन और वैभव की देवी, माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. सोने का आभूषण कमर के ऊपरी हिस्से में ही पहना जाना चाहिए ताकि इसे अशुद्धियों से बचाया जा सके (Preserve Purity) और इसके साथ ही माता लक्ष्मी की कृपा अक्षुण्ण रहे.
सोने और चांदी का शारीरिक और ऊर्जात्मक महत्व
सोना जो कि सूर्य की ऊर्जा (Solar Energy) का प्रतिनिधित्व करता है, शरीर के ऊपरी भाग में पहनने से सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देता है. वहीं, चांदी शरीर के निचले भाग में पहनी जाती है क्योंकि यह शरीर से नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को बाहर निकालने में सहायक होती है. इस प्रकार, यह दोनों धातुएँ शरीर और ऊर्जा के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं
धार्मिक रूप से, सोने के आभूषणों को पैरों में पहनना निषेध है क्योंकि यह मान्यता है कि पैर अधिक शारीरिक संपर्क में आते हैं और अशुद्धियों के संपर्क में रहते हैं. इसी तरह, चांदी शुद्धि क्रिया (Purification Process) को सहायता प्रदान करती है, जिससे यह शरीर की निचली ऊर्जाओं के लिए उपयुक्त होती है.